डाल्टन का परमाणुवाद (परमाणु-सिद्धांत) (DALTON'S ATOMIC THEORY)

डाल्टन का परमाणुवाद (परमाणु-सिद्धांत) 

(DALTON'S ATOMIC THEORY)
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1.सभी तत्वअत्यंत सूक्ष्म (छोटे छोटे) कणों से बने होते हैं, उन कणों को परमाणु कहते हैं |
2.परमाणु अबिभाज्य तथा नित्य होते हैं अर्थात इनका न तो बिनाश होता है और न ही निर्माण होता है |
3.किसी एक तत्व के सभी परमाणु हर तरह (आकर, भार, आदि) से समान होते हैं |
4.भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु भिन्न-भिन्न भार वाले तथा भिन्न-भिन्न गुणवाले होते हैं |
5.दो या दो से अधिक तत्व परमाणु-भार के बिचार से सरल अनुपात में संयोग कर यौगिक का निर्माण करते हैं |
6.यौगिक के सुक्ष्तम (सबसे छोटे ) कण को यौगिक परमाणु कहते हैं |
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  • परमाणुकता:-
किसी तत्व या यौगिक के एक अणु में उपस्थित परमाणुओं की संख्या को उसकी परमाणुकता कहते है | जैसे :-नाइट्रोजन (N2) की परमाणुकता 2,ऑक्सीजन (O2) की परमाणुकता 2 है |HNO3 की परमाणुकता 5 होती है |
  • पदार्थों का वर्गीकरण:-
भौतिक अवस्था के आधार पर पदार्थों का वर्गीकरण तीन प्रकार से होता है |

(a) ठोस (b) द्रव (c) गैस

(a)ठोस:-पदार्थ की वह अवस्था, जिसमे उसके आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं, उसे ठोस कहते हैं |पदार्थ की ठोस-अवस्था में उसके अनुओ के बीच अंतरान्विक बल अधिक मजबूत रहता है |

(b)द्रव:-पदार्थ की वह अवस्था, जिसमे उसका आयतन तो निश्चित होता है, परन्तु आकार निश्चित नहीं होता है, उसे द्रव कहते हैं |द्रव-अवस्था में अनुओ के बीच का अंतरान्विक बल ठोस के अनुओ के बीच के आकर्षण बल से कमजोर होता है |

(c)गैस:-पदार्थ की वह अवस्था, जिसमे उसका आयतन और आकार दोनों अनिश्चित होते हैं, उसे गैस कहते हैं |गैस के अनुओ के बीच आकर्षण बल सबसे कम होता है |

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